28 March से शुरु होने जा रहा है T+0 Days में Settlement

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SEBI T+0 Settlement: SEBI ने T+0 Settlement के बारे में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। SEBI के चेयरमैन, माधवी पुरी बुच, ने एक एमएफआई कार्यक्रम में कहा कि 28 मार्च से भारत में T+0 ट्रेड साइकिल Settlement वैकल्पिक रूप से शुरू की जाएगी। T+0 Settlement का मतलब है कि व्यापार की एक ही दिन में ही Settlement हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक सकारात्मक कदम है और यह ट्रेडिंग की लागत को कम करेगा।

वर्तमान में, भारत में T+1 Settlement लागू है। इसके अनुसार, जब आप शेयर बाजार में कुछ खरीदते हैं या बेचते हैं, तो सब कुछ सेटल होने में एक दिन का समय लगता है। यानी अगर आपने आज शेयर खरीदा या बेचा है तो उसका Settlement कल तक होगा। लेकिन जब T+0 Settlement लागू हो जाएगा तो सारा Settlement उसी दिन ही पूरा हो जाएगा।

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घटेगी ट्रेड करने कि Costing

SAS आनलाइन के फाउंडर और सीईओ, श्रेय जैन, यह कहते हैं कि T+0 Settlement से सिस्टम के अंदर Brokers  को अपने फंड को मुक्त करने में मदद मिलेगी, जिससे ट्रेडिंग की कुल लागत कम होगी। वर्तमान में, जब कोई ग्राहक शेयर बेचता है, तो राशि तुरंत ट्रेडिंग खाते में जमा कर दी जाती है। ग्राहक को इस पूंजी के साथ ट्रेडिंग करने या आगे की Delivery खरीदने के लिए स्वतंत्रता है। एक्सचेंज साइड पर यह फंड T+1 Settlement के बाद ही ब्रोकर को जमा किया जाता है। T+0 Settlement के साथ, फंड शाम 4:30 बजे तक प्राप्त हो जाएगा, जिससे व्यापारिक Brokers  की पूंजी में खिचाव नहीं होगा

पहले Phase में शुरु होगा Same Day Settlement

SEBI ने T+0 Settlement को दो फेजों में लागू करने का प्रस्ताव दिया था। T+0 Settlement के पहले फेज में सेम-डे Settlement को लागू किया जाएगा, जिसके बाद खरीदारो को उसी शेयर को उसी दिन बेचकर उसी दिन फंड मिल जाएगा।

इसमें अगर आप ट्रेडिंग-डे पर 1:30 बजे तक शेयरों का कारोबार करेंगे तो शाम 4:30 बजे तक उनका Settlement हो जाएगा। वहीं, दूसरे फेज में 3:30 बजे तक किए गए सभी लेन-देन के लिए एक Optional Immediate Trade-by-Trade Settlement की सुविधा दी जाएगी।

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पिछले साल सेबी ने T+0 Settlement साइकल को लेकर एक एजवाइजरी जारी किया था। उस दौरान मार्केट रेगुलेटर ने कहा था कि T+0 Settlement की व्यवस्था अभी मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से टॉप 500 कंपनियों को ही उपलब्ध कराई जाएगी। T+1 की ही तर्ज पर T+0 भी 3 फेजों में लागू होगा। सबसे कम एमकैप वाली 200 कंपनियाँ पहले इसका फायदा ले पाएंगी। उसके बाद उनसे ज्यादा एमकैप वाली 200 और अंत में सबसे ज्यादा एमकैप वाली 100 कंपनियाँ इसके दायरे में आएँगी।

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